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    जितेंद्र तोमक्याल

     

     जितेंद्र तोमक्याल

     जन्म: फरवरी 1, 1987 
     जन्म स्थान:  मुन्सयारी, पिथौरागढ़ 
     पिता: श्री गोपाल सिंह तोमक्याल 
     माता:  श्रीमती उदिमा देवी 
     पत्नी:  -
     बच्चे:  -
     व्यवसाय:  लोक गायक


    लगभग चालिश से भी ज्यादा गढ़वाली एलबम निकाल चुके पहाड़ की सनसनी आवाज जितेंद्र तोमक्याल को सभी जानते हैं। इनके गाने बड़े और बूढ़े सभी को झूमने पर मजबूर कर देते हैं और एक समा बांध देते हैं।

    प्रारंभिक जीवन

    जितेंद्र तोमक्याल का जन्म 1 फरवरी 1987 को पिथौरागढ़ में मुन्सयारी में हुआ था। उनके पिता का नाम गोपाल सिंह तोमक्याल और मां का नाम उदिमा देवी था। पिता के साथ जितेंद्र का ज्यादा प्रेम था और उसी प्रेम के कारण वह उत्तराखंड के जाने—माने लोकगायक बन गए। जितेंद्र की शिक्षा—दिक्षा गांव में ही हुई। घर के पास ही शिशु मंदिर से उन्होंने पहली से लेकर पांचवी तक की पढ़ाई की और फिर उसके बाद राजकीय इंटर कॉलेज से अपनी बारहवीं तक की पढ़ाई की। बीए करने के लिए फिर वह पिथौरागढ़ आए और वहीं से उन्होंने अपने संगीत की यात्रा शुरू की। संगीेत को अपना क​रियर बनाने की प्रेरणा जितेंद्र को अपने पिता से ही मिली। उनके पिता गोपाल भी संगीत में रुचि रखते थे और पहाड़ी गाने गुनगुनाया करते थे। पिता के साथ ही उन्होंने संगीत की पहली क्लास ली और वहीं से शुरू हुआ लो​कगायक बनने का सफर।

    करियर

    जितेंद्र की पहली एलबम वैष्णो प्रोडक्शन के तहत बनी थी जो कि 2007 में रिलीज हुई थी। उनकी इस एलबम का नाम था मेरा दिल म़़ा। उसके बाद उनकी कई एलबम रिलीज हुई और फिर तेरा प्यार मा और डाली के गुलाब आदि रिलीज किए। उनकी लो​कप्रिय एलबम बांध बिमला 2014 में रिलीज हुई और तब से उनकी सभी गाने उत्तराखंड के हर घर में बजते हैं। 2012 में जितेंद्र की शादी भावना तोम्क्याल से हुई और उनका अभी 3 साल का एक बेटा है जिसका नाम तनु है। काम में व्यस्त रहने के कारण जितेंद्र घर पर पत्नी और बेटे को ज्यादा समय नहीं दे पाते हैं।

    विदेशों में जलवा 

    पिछले साल जितेंद्र को उनके गाने के लिए दुबई बुलाया गया। जहां पर उन्होंने उत्तराखंड के लोकगीत गाकर दुबई में रहने वाले भारतीयों को भावुक कर दिया। जितेंद्र का कहना है कि दुबई में उन्होंने देखा कि वहां पर रहने वाले भारतीय भले ही अपने पहाड़ से लाखों ​मील दूर रहते हैं, ले​किन वहां की सभ्यता और लोकगीतों से वह अभी भी कई जुड़े हुए हैं। जितेंद्र को मस्कट और खाड़ी के दूसरे कई देशों में जाने का मौका मिला।


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