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    कुमाऊंनी मुकुट

    kumauni wedding

    कुमाउँनी मुकुट पहने हुए वर-वधु


    भारत मान्यताओं और संस्कृति की अनूठी परम्पराओं का देश रहा है। इन्ही संस्कृति में शादियों में दूल्हा और दुल्हन के मुकुट पहनने की परम्परा लगभग पूरे भारत वर्ष में पायी जाती है, बस संस्कृति के अनुसार मुकुट बदल जाते है। कुमाऊंनी मुकुट की खासियत इसका आकार, सजावट व गणेश और राधा-कृष्ण के चित्र हैं। कुमाउँनी विवाह में वर-वधु के मस्तक पर मुकुट बांधने की बहुत पुरानी परम्परा है। मुकुट बनाना एक प्रकार की हस्तशिल्प कला है। हाथो द्वारा ही मुकुट को आकार तथा सजाया जाता है पिछले कुछ दशक तक कुमाउँनी मुकुट बांस के सीक से बनाये जाते थे। सीक के दोनों तरफ सादा पेपर चिपका कर हल्का सा गोल घुमा कर इसके किनारे पर कागज के रंगीन फूल बनाये जाते थे। बीच में राधा-कृष्ण और गणेश के चित्र, मुकुट के ऊपर दो तोते के चित्र होते थे। वर के मुकुट पर श्री गणेश का चित्र शुभ फलदायक और वधू के मुकुट पर राधा कृष्ण का चित्र अटूट प्रेम का प्रतीक होता है। Kumaoni Mukut


    आप भी श्री सुरेश चन्द्र जोशी द्वारा निर्मित सुन्‍दर मुकुट भारत में कहीं भी निम्न मोबाइल नंबर पे संपर्क करके माँगा सकते है। Kumaoni Mukut - Traditional Kumauni Wedding
    +91-9927921662


    kumauni tradition

    प्राचीन वर मुकुट

    kumauni tradition

    प्राचीन वधु मुकुट


    बदलते दौर के साथ मुकुट और इसके पहनने के तरीके में काफी बदलाव आया है, अब मुकुट गत्ते से बनाए जाते हैं। राधा-कृष्ण और गणेश के चित्र भी दिल्ली से छप के आने लगे हैं। मुकुट पर बनने वाले फूल और तोते की जगह लेस ने ले ली है। मुकुट का साइज भी मांग के अनुसार छोटा हो गया है।


    kumauni tradition

    नवीन वर मुकुट

    kumauni tradition

    नवीन वधु मुकुट


    यह मान्यता भी है कि वर बारात के घर वापिस लौटने के बाद मुकुटों को पूजा पाठ के बाद पानी के स्रोतो जैसे नौलों के पास रख दिया जाता है। कुमाऊँ क्षेत्र के सबसे प्राचीन मुकुट विक्रेता श्री सुरेश चन्द्र जोशी जी (पं. गोपाल दत्त जोशी, बुक सेलर, चौक बाजार, अल्मोड़ा) बताते है कि कुमाउँनी मुकुट की बिक्री अल्मोड़ा से ही शुरू हुई थी। 1990 के आस पास तक मुकुट अल्मोड़ा से ही पूरे कुमाऊं में भेजें जाते थे। उनके दादा पंडित गोपाल दत्त जोशी जी ने 1898 में मुकुट बना कर बेचने की शुरुआत की थी। जोशी जी बताते है कि 1970 में एक जोड़ा मुकुट लगभग 60 पैसे में आता था, जबकि महंगा मुकुट 5 रुपए का आता था। अब मुकुट की कीमत 100 से लेकर 400 रुपए तक हो गई है। गत्ते पर प्रिंटेड फोटो और लेस चिपका कर मुकुट बनाने का कार्य अब भी वह स्वयं ही कर रहे है।


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    +91-9927921662



    लेखक -श्री सुरेश चन्द्र जोशी, श्री पं० गोपाल दत्त जोशी, बुकसेलर, चौकबाजार, अल्मोड़ा
    चित्र -
    वैभव जोशी


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