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    मंगलेश डंगवाल

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    मंगलेश डंगवाल


    उत्तराखंड के मशहूर लोकगायक मंगलेश डंगवाल ने अपने लोकगीतों से और गढ़वाली गानों से न सिर्फ उत्तराखंड में बल्कि विदेशों में भी पर्वतीय क्षेत्रों के गानों से अपना नाम बनाया है। हाल ही में उत्तराखंड न्यूजीलैंड ऐशोसिएशन ने उन्हें न्यूजीलैंड बुलाया था ​जहां पर उन्होंने उत्तराखंड के लोकगीत गाकर उत्तराखंड का नाम रोशन कर दिया। उन्हें वहां पर सम्मनित भी किया गया।

    प्रारंभिक जीवन

    मंगलेश डंगवाल का जन्म उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हुआ था, वहीं पर उनकी शिक्षा—दिक्षा भी हुई। बचपन से ही संगीत के प्रति उनकी काफी दिलचस्पी थी, लेकिन स्कूल खत्म होते—होते उन्होंने इसमें अपना करियर बनाने की भी ठान ली। हालांकि मन में भी डर भी था कि उनका लोकगीतों के लिए प्यार उन्हें एक अच्छा भविष्य दे पाएगा कि नहीं लेकिन फिर भी उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं लिए और इसमें काम करना शुरू कर दिया। अब तक मंगलेश ने एक दर्जन ने ज्यादा म्यूजिक एलबम और 700 से ज्यादा स्टेज परफॉर्मेंस दे दी हैं।

    करियर

    मंगलेश की सबसे पॉपुलर एलबम माया बांध हैं जिसे लाखों लोगों ने सुना है और इस एलबम के बाद मंगलेश की जिंदगी बदल गई थी। उसके बाद उनकी तीलू रौतेली भी काफी पसंद की गई। मंगलेश ने अपनी कई सुपरहिट एलबम उत्तराखंड की लता मंगेशकर कहलाने वाली मीना राणा के साथ गाई हैं। मंगलेश कहते हैं कि माया बांध एलबम बाजार में जब आई तभी से उनकी जिंदगी ने एक अलग मोड़ ले लिया। उस एलबम को लोगों ने जो रिस्पॉन्स दिया उससे साबित हो गया कि आज भी उत्तराख्ंड के लोग अपनी भाषा में ऐसे गाने चाहते हैं जो जागर और लोकगीत से अलग हों। इसलिए उन्होंने उसके बाद कई एलबम बनाई जिससे वह उत्तराखंड के स्टार बन गए।

    उत्तराखंड के लिए मंगलेश का सपना 

    उत्तराखंड को साफ बनाने के लिए मंगलेश अक्सर लोगों को जागरुक करना चाहते हैं। उनका कहना है कि मैं चाहता हूं कि मेरा यूके यानी उत्तराखंड विदेश के यूके यानी यूनाईटेड किंगडम की तरह साफ और विकासशील बन जाए। मंगलेश चाहते हैं कि उनकी देवभूमी की महिलाएं अलग—अलग क्षेत्रों में काम करें और वह चूल्हा—चौका छोड़कर उत्तराखंड के विकास में भागीदार बनें।


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