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    तीरथ सिंह रावत - उत्तराखंड के 9वें मुख्यमंत्री

    Tirath Singh Rawat

    तीरथ सिंह रावत

    जन्मअप्रैल 09, 1964
    जन्म स्थानग्राम - सीरों, पौड़ी गढ़वाल
    माताश्रीमती गौरा देवी
    पिताश्री कलम सिंह रावत
    पत्नीश्रीमती डॉ रश्मी त्यागी रावत
    शिक्षापरास्नातक, पत्रकारिता में डिप्लोमा
    राजनीतिक दलभारतीय जनता पार्टी

    तीरथ सिंह रावत भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता है। वह वर्तमान में उत्तराखंड की पौड़ी लोकसभा सीट से सांसद है। वह इससे पहले साल 2012- 2017 में चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे। 09 मार्च, 2021 को त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद 10 मार्च, 2021 को सर्वसम्मति से तीरथ सिंह रावत उत्तराखंड को मुख्यमंत्री बनाया गया। तीरथ सिंह रावत उत्तराखंड के 9वें मुख्यमंत्री है और पौड़ी जिले से 5वें मुख्यमंत्री है।


    व्यक्तिगत जीवन


    तीरथ सिंह रावत का जन्म पौड़ी गढ़वाल के सीरों, पट्टी असवालस्यूं नामक स्थान में हुआ था। उनके जन्म की तिथि 9 अप्रैल 1964 है। उनके पिता नाम का कलम सिंह रावत और माता का नाम गौरा देवी था। उन्होंने हेमवती नंदन गढ़वाल विश्वविधालय से बैचलर ऑफ आर्ट्स (बी.ए) का स्नातक कोर्स किया है।


    उन्होंने श्रीनगर गढ़वाल के बिरला कॉलेज से समाजशास्त्र में परस्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा की शिक्षा ग्रहण करी है। पढ़ाई पूरी करने के बाद से ही उन्होंने आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के साथ जुड़ के बतौर सामाजिक कार्यकर्ता कार्य करना शुरू कर दिया और मात्र 20 वर्ष की उम्र में 1983 में उसके प्रान्त प्रचारक बन गए।


    राजनीतिक जीवन


    साल 1983 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बतौर युवा प्रचारक के रूप में अपनी शुरुआत करने वाले श्री रावत जी अपनी राजनीतिक दीक्षा प्राप्त कर के उन्होंने छात्र जीवन के दौरान आरएसएस की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में राज्य के संगठन मंत्री का पद संभाला। उनके शानदार काम की वजह से उन्हें राष्ट्रीय संगठन मंत्री का पद भी मिला। उन्होंने हेमवती नंदन गढ़वाल विश्व विद्यालय के छात्र संघ का चुनाव लड़ा और सफलतापूर्वक अध्यक्ष पद के लिए चुने गए। वह छात्र संघ मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे।


    वह 90 के दशक में चले अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े और दो साल जेल में रहे। उन्होंने प्रदेश में मुज्जफरनगर (रामपुर तिराहे) से गढ़वाल तक शहीद यात्रा की अगुवाई की थी।


    उन्होंने 90 के दशक में उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी और वर्ष 2000 में जब उत्तराखंड राज्य बना तो वह पहली राज्य सरकार के शिक्षा मंत्री बने थे। आंदोलन के दौरान बानी प्रदेश छाया सरकार (शैडो कैबिनेट) में भी वह मंत्री रहे। उत्तर प्रदेश में भी उन्होंने वर्ष 1997 में राज्य के बनने से पहले बतौर विधान परिषद सदस्य कार्य किया था। वह विनिश्चय संकलन समिति के अध्यक्ष भी चुने गए थे जो विधान परिषद के अधीन आती है।


    साल 2007 में उन्हें भाजपा उत्तराखंड इकाई का महामंत्री चुना गया। इसके बाद उन्हें प्रदेश भाजपा चुनाव अधिकारी और प्रदेश सदस्यता अभियान का प्रमुख का पदभार भी दिया गया। अपनी अद्वितीय धार्मिक समझ के कारण उन्हें दैवीय आपदा प्रबंधन समिति का अध्यक्ष भी चुना गया था। वह फरवरी 2013 से दिसंबर 2015 तक उत्तराखंड भाजपा के अध्यक्ष भी रहे।


    वर्ष 2017 में उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करवाते हुए भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। साल 2019 में सपन्न हुए हिमांचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्हें प्रदेश चुनाव प्रदेश प्रभारी की ज़िम्मेदारी दी गई थी जिसे उन्होंने बखूबी से निभाया और राज्य में पार्टी की शानदार जीत में अहम भूमिका निभाई। वर्तमान में वह भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के अहम सदस्य है और पार्टी के कई उपक्रमों से जुड़े है।


    2007 में बीजेपी प्रदेश महामंत्री, प्रदेश सदस्यता व आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के अध्यक्ष के तौर पर भी चुने गए। 2012 में चौबट्टाखाल से विधायक बने थे, खास बात यह कि 2012 में बीजेपी के तमाम दिग्गज नेता हार गए थे, तीरथ जी विधायकी जीतने में कामयाब रहे थे। 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में इन्होंने पौड़ी गढ़वाल सीट पर मनीष खंडूरी (बी.एस. खंडूरी के बेटे) को 2,85,003 से अधिक मतों से हराया था और सांसद बने थे।


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