Folk Songs


    जै जै बागनाथ तेरी

    कुली बेगार आन्दोजन में गौर्दा का बहुत जुड़ाव था क्योंकि वे शोषित जनता के दर्द से दुःखी थे। इसी कारण अपनी कविताओं से इस कुप्रथा पर प्रहार का मौका वे नहीं चूकते।


    जै जै बागनाथ तेरी, जै जै गड़ माई।
    तेरा दरबार। यो खोरा भार।
    कुली को उतार दियो कलंक वगाई।
    सभा एक करि। सॅंकि गंगा धरि।
    चाहे जूंला मरी कयो कुल्ली निद्यू भाई।

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